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मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूँ कि मैंने नीरज जी के साथ संवाद किया है, उन्हें देखा , सुना और महसूस किया है । वे जितने बड़े रोमानी कवि थे उतने महान यथार्थ के चितेरे थे । हिंदुस्तान की बात खास अंदाज में सलीके से करते थे । उनकी यह पंक्तियां कितनी समीचीन प्रतीत होती हैं- ज्यों लूट के कहार ही दुल्हन की पालकी हालत यही है आज कल हिंदुस्तान की उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला । वे गीतों के ऋषि व राजकुमार थे । कई फिल्मों में विशेषकर देवानंद की फिल्मों में उनके गीतों के सम्मोहन के प्रीतिपाश में देश आज भी है। उनके यश का कारवां आज भी उसी धज से गुजर रहा है । उन्होंने सिनेमा में साहित्य को प्रतिष्ठित किया । ये भाई जरा देख के चलो, रंगीला रे जैसे गीतों पर देश झूमा तो कारवां गुजर गया पर देश ठहर गया ।