
आप की आदतें मिलती हैं फ़रिश्तों से बहुत
ख़ुद को मुमकिन हो तो मौसम से बचाते रहिए
सुबह ही माता जी ने कहा कि पूस की अमावस है, काफ़ी सर्दी होगी , घर से बाहर न निकलना । सचमुच रात को लगा कि रोहतांग घाटी की बर्फीली सर्दी बर्फ़ का पैहरन उतार कर लखनऊ आ गई है । रूम हीटर जला कर मैं भी डबल रज़ाई ओढ़ कर सो । क़रीब सवा बजे फ़ोन की घंटी बजी, हिम्मत जुटा कर फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ़ दीपक मिश्र जी थी । तीन शब्दों का एक वाक्य सूत्र की तरह बोलकर कि तुरंत आ जाइए फ़ोन काट दिया । मैं दुविधा में... वो कभी इस तरह बुलाते नहीं, बुलाना तो दूर कभी १० बजे बजे के बाद फ़ोन तक नहीं किया । तभी उन्हीं का दोबारा फ़ोन आया कि कार की बजाय मोटर साइकिल से आना । पत्नी को जगा कर बताया कि दीपक भाई ने मोटर साइकिल से आने को कहा है । उसने मेरी ओर रहस्यमयी निगाहों से देखते हुए कहा कि जान देने की ज़रूरत नहीं है । इतनी सर्दी में बाहर निकलना मौत को दावत देना है । जाना बहुत ज़रूरी हो तो कार ले के जाओ । मैं दीपक भाई के पास पहुँचा । वो पूरी तरह से तैयार बैठे थे । पिट्ठू बैग को पीठ पर लादा और कहा चलो । कार को देखते ही बोले, यार मोटर साइकिल से आने को कहा था, अनावश्यक पेट्रोल क्यों फूंक रहे । देश के ऊपर ५४३ अरब डालर का क़र्ज़ चढ़ चुका है, पेट्रोल का आयात बढ़ते क़र्ज़ का कारण है । उनकी बातें अच्छी तो नहीं लग रही थी , पर सुनने के अलावा कोई चारा नहीं था ।उन्होंने मुझे अपना बैग पकड़वाया और एक्टिवा निकाली । मुझे पीछे बिठाया और निकल पड़े, नामालूम कहाँ के लिए ....। सड़क पर एक-दो ठिठुरते आवारा कुत्तों के अलावा कोई सजीव नहीं दिखा । राजभवन कॉलोनी के एक बुजुर्ग ठंडी से ख़ुद को बचाने के लिए प्रयासरत दिखा । मैं कुछ सोच पाता दीपक भाई ने एक्टिवा रोकी । मुझसे बैग लिया । बैग से एक शाल और स्वीटर निकाल कर उस बुजुर्ग को ओढ़ा दिया । उसे गर्म कपड़े देकर पुनः एक्टिवा सम्भाली और सड़क के हमकदम बन गए । मुझे लगा कि ट्रेन या बस पकड़नी होगी पर अचानक वो मुख्य सड़क से उतर कर गलियों में जाने लगे । एक वैसे ही हड्डीगलाऊ सर्दी ऊपर दोपहिए की सवारी... लग रहा था कि कहीं ये रात आख़िरी न हो । वे कभी इस गली तो उस गली । एक गली में एक बूढ़ी महिला दिखी । उसके बदन पर कपड़े तो थे पर स्वीटर वग़ैरह नहीं थे । भाई साहब ने उसे भी कपड़े दिए और आगे बढ़ गए । एक ऐसी पतली गली में हम लोग पहुँचे जहां रिक्शा तक न जा सके । उसमें स्वागत करने के लिए एक पागल पहले मौजूद था जिसके शरीर से बदबू दूर तक फैल रही थी । दीपक जी ने उसे भी कपड़े दिए । सुबह ४ बजे तक बैग ख़ाली हो गया । हम लोग वापस लौटे । अब समझा उन्होंने कार से न आने के लिए क्यों कहा था । इसी दौरान मैंने उनकी एक तस्वीर उतार ली जो वाइरल होने के लिए आतुर है
मनीष मिश्र