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जो लोग आपसे मिलें और कहें कि हिंदुस्तान के मुसलमान पाकिस्तान-परस्त हैं, इस्लाम के कारण वे भारत-माता के सपूत नहीं हो सकते । आँखें बंद करें, अशफाक उल्ला खान, इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा देने वाले चचा हसरत मोहानी, जय हिंद का उद्घोष देने वाले आबिद हसन सफ़रानी, कृष्णाश्रयी कवि रसखान , भगत सिंह का मुक़दमा लड़ने वाले आसफ़ अली व पाकिस्तान को धूल चटाने वाले ब्रिगेडियर उशमान व वीर अब्दुल हमीद के रूहानी चेहरे सोचें और मान लें कि ऐसी बातें कहने वाले साम्प्रदायिक और देशद्रोही हैं । उनके लिए धर्म वैयक्तिक आस्था नहीं, राजनीतिक हथियार है । भारतीय मनीषा कहती है कि धर्म कभी राष्ट्र नहीं हो सकता । राष्ट्रवाद अलग धारणा है, धर्म अलग धारणा है । धर्म व राजनीति को व्यापार बनाने वाले स्मगलरों से सावधान रहें । इसी में हम सभी का हित है ।

मैं न कट्टर हिंदू न मुसलमान हूँ
न मेरा कोई संघ है ,न लीग है
मैं अल्पसंख्यक हूँ हिंदुस्तान हूँ

दीपक